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मत कहिए मेरे बेटे को 'आतंकवादी' : कन्हैया की मां


नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया की मां ने कहा है, “कृपया मेरे बेटे को आतंकवादी मत कहिए.” बिहार के बेगुसराय जिले में पड़ोसी के घर पर टीवी समाचार देखकर वह रो पड़ीं.
उसकी मां मीना देवी ने बिहार से पीटीआई भाषा को फोन पर बताया, “हमें जब से पता चला है कि कन्हैया को गिरफ्तार कर लिया गया है, तब से हम लगातार टीवी देख रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि पुलिस उसे बहुत ज्यादा नहीं पीटेगी. उसने कभी भी अपने माता पिता का अपमान नहीं किया, देश की बात तो भूल ही जाइए. कृपया मेरे बेटे को आतंकवादी नहीं बोलिए. वह यह नहीं हो सकता है.”
मीना एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हैं और साढ़े तीन हजार रूपये प्रति माह कमाती हैं. उन्होंने कहा कि वह और उनका बड़ा बेटा मणिकांत ही घर में कमाने वाले हैं क्योंकि उनके 65 वर्षीय पति लकवाग्रस्त होने की वजह से सात वर्षों से बिस्तर पर हैं.
कन्हैया के किसान पिता जयशंकर सिंह ने कहा कि उनके बेटे को हिन्दुत्व राजनीति का विरोध करने के कारण मामले में फंसाया जा रहा है.
आपको बता दें कि कन्हैया के माता-पिता बिहार के बेगूसराय जिले के मसलानपुर गांव में रहते हैं. यह जिला वामपंथी राजनीति का गढ़ माना जाता है.
उन्होंने कहा, “मेरा बेटा भाजपा सरकार के खिलाफ कई अभियानों का हिस्सा रहा है, चाहे फैलोशिप हो या हैदराबाद विश्वविद्यालय में दलित छात्र की आत्महत्या का मामला. उसे हिन्दुत्व राजनीति का विरोध करने की सजा दी जा रही है.”
सिंह कहा, “कन्हैया कभी भी राष्ट्र विरोधी नहीं हो सकता है. उसके राष्ट्र विरोधी विचारधारा का अनुसरण करने का कोई सवाल ही नहीं है. वह अपने उम्र के हजारों युवाओं की तरह ही राष्ट्रवादी है. वह ‘भारत माता’ का अपमान नहीं कर सकता है. कन्हैया के अन्य भाई प्रिंस ने उसकी गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया कि यह चिंतनीय है कि रष्ट्र विरोधी ताकतें जिनकी स्वाधीनता आंदोलन में कोई भूमिका नहीं थीं, वह आज मेरे भाई और उसके विश्वविद्यालय को राष्ट्र विरोधी बता रहे हैं. यह मुद्दा सिर्फ कन्हैया के बारे में नहीं है, बल्कि उससे काफी बड़ा है.

JNU विवाद में आतंकी हाफिज सईद का समर्थन - गृहमंत्री


इलाहाबाद: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भीतर देशद्रोह का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. अब गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि जेएनयू में हो रहे प्रदर्शन को लश्कर के मुखिया हाफ़िज़ सईद का भी समर्थन प्राप्त है.
गृह मंत्री ने कहा कि हाफिज सईद ने इस घटना का जो समर्थन किया है वह दुर्भाग्यपूर्ण है और समूचे देश को इस बारे में गंभीरता से सोचना चाहिए. उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियों को नसीहत देते हुए कहा है कि वह देशद्रोह जैसी घटना का सियासी फायदा लेने की कोशिश न करें.
गृह मंत्री ने सभी संगठनों और सियासी पार्टियों से अपील की है कि वह देश के खिलाफ होने वाली घटना को अपने फायदे नुकसान के नजरिये से न देखें और इस मुद्दे पर एकजुट होकर देश का समर्थन करें. उनके मुताबिक़ देश से जुड़े सवाल पर सियासत करने के बजाय सब को साथ खड़े होना चाहिए. राजनाथ सिंह ने फिर दोहराया है कि जेएनयू की घटना में दोषी लोगों को कतई बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई तो होगी, लेकिन किसी भी निर्दोष का उत्पीड़न नहीं होने दिया जाएगा.

जेएनयू के देशद्रोहियों को मार देनी चाहिये गोली - साक्षी महाराज


उन्नाव: JNU के देशद्रोह विवाद पर लगातार बवाल बढ़ता जा रहा है. अब इस विवाद में बीजेपी के बड़बोले सांसद साक्षी महाराज भी कूद गए हैं.
अपने चुनाव क्षेत्र उन्नाव पहुंचे साक्षी महाराज ने कहा कि राष्ट्र का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और जेएनयू के ‘देशद्रोह’ के आरोपियों के खिलाफ आजीवन कारवास की जगह फांसी मिलनी चाहिए या पुलिस को गोली मार देनी चाहिए.
साक्षी ने कहा कि मदरसे में आतंकवाद की शिक्षा के बयान पर बहुत बवाल खड़ा किया गया जिसके बाद कई मदरसे पकडे भी गए और अब ये आतंकवाद विश्वविद्यालय तक पहुंच गया है.
साक्षी ने सीताराम येचुरी समेत कांग्रेसियों को नकली मुसलमान बताते हुए कहा कि वो लोग राजनीतिक रोटिया सेंक रहे हैं, यही नहीं मोदी और केंद्र सरकार से आरोपियों पर सख्त कार्यवाही की मांग करते हुए साक्षी ने कहा की अगर ऐसा नहीं किया तो स्थिति भयावह हो सकती है.
आपको बता दें कि 9 फरवरी को जेएनयू में अफजल गुरू की फांसी की बरसी पर एक कार्यक्रम हुआ था जिसमें भारत विरोधी नारे लगे थे. इस कार्यक्रम के बाद से ही जेएनयू सुर्खियों में है.

प्रशांत किशोर अब कांग्रेस के साथ पंजाब चुनाव में करेंगे काम



नयी दिल्ली/चंडीगढ़: 2014 लोकसभा में नरेंद्र मोदी फिर 2015 में बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार की नैय्या पार लगाने के बाद अब प्रशांत किशोर पंजाब में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों में पंजाब कांग्रेस के लिए काम करेंगे.
पंजाब कांग्रेस प्रमुख अमरिंदर सिंह ने इसका खुलासा करते हुए कहा, ‘‘अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) ने पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों में पंजाब कांग्रेस की मदद के लिए किशोर के लिए अपनी मंजूरी दे दी है.’’
पंजाब विधानसभा चुनाव अगले वर्ष की शुरूआत में होने हैं और बीते नौ वर्ष से सत्ता से बाहर कांग्रेस फिर से सत्ता में आने के प्रयास में है.
प्रशांत किशोर वर्ष 2014 लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी के और 2015 में बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार के चुनाव रणनीतिकार बन कर दोनों को सफलता दिला चुके हैं.
सूत्रों ने कहा कि पंजाब कांग्रेस चुनावों की तैयारियों में किशोर के साथ संयुक्त रूप से चुनावों की रणनीति बनाएगी.

एक साल केजरीवाल करेंगे नयी योजनाओं का ऐलान


नई दिल्ली: दिल्ली में सत्तारुढ़ आप सरकार आज एक साल पूरा कर रही है. आम आदमी पार्टी सरकार एक साल के कार्यकाल को ‘एक साल बेमिसाल’ के रुप में मना रही है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनका मंत्रिमंडल आज फोन पर जनता के सवाल और सुझाव सुनेगा.
केजरीवाल सरकार आज सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच कैबिनेट फोन पर लोगों के सवाल और सुझाव सुनेगी. यह कार्यक्रम एनडीएमसी कन्वेंशन सेंटर में आयोजित किया गया है.
उधर केजरीवाल सरकार के खिलाफ बीजेपी और कांग्रेस के नेता आज प्रदर्शन करने वाले हैं . कांग्रेस छलावा दिवस मनाएगी जबकि बीजेपी काला दिवस मनाने वाली है.

कांग्रेस ने लगाया ABVP पर आरोप कहा, JNU में हुआ आनंद शर्मा पर ब्लेड से हमला


नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने शनिवार रात आरोप लगाया कि जब वह छात्रों द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लेने के बाद राहुल गांधी के साथ लौट रहे थे तो जेएनयू परिसर में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने उन पर शारीरिक रूप से हमला किया.
उन्होंने कहा कि एसपीजी को गांधी को एक वैकल्पिक वाहन में ले जाना पड़ा क्योंकि कथित हमलावरों ने कांग्रेस उपाध्यक्ष का वाहन भी घेर लिया था.
कांग्रेस के दावे के मुताबिक यह हमला विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन स्थल से कुछ दूरी पर हुआ और एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने अंधेरे का फायदा उठाया.
शर्मा ने कहा कि हमले के बाद मेरे बाएं कान से खून बह रहा था और मुझे कुछ चोटें भी लगीं. इस पर कांग्रेस ने कहा है कि यह भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन है.
आनंद शर्मा पर सरकार से सुरक्षा प्राप्त एबीवीपी के गुंडों ने जेएनयू कैंपस में सार्वजनिक हमला किया है. कांग्रेस ने कल की घटना को लोकतंत्र के लिए काला दिवस मनाते हुए पीएम से कार्रवाई की मांग की है .
कांग्रेस ने सवाल उठाया, “राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता पर एबीवीपी के गुंडे कैंपस में कैसे हमला कर सकते हैं? क्या प्रधानमंत्री अब एबीवीपी के गुंडों और आनंद शर्मा को सुरक्षा देने में नाकाम रहने वाली पुलिस पर कार्रवाई करेंगे.
जेएनयू विवाद बना विचारधारा की लड़ाई
जेएनयू विवाद अब बीजेपी और उसके वामपंथी विरोधियों के बीच विचारधारा की लड़ाई बन गया है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने वामपंथी पार्टियों के समर्थन में उतरते हुए मोदी सरकार की तुलना हिटलर के शासनकाल से की.
एआईएसएफ के सदस्य और जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष कन्हैया कुमार की गिरफ्तारी ने पूरे मामले को दो खेमों में बांट दिया है. इस बीच, सरकार ने ऐलान किया है कि जेएनयू जैसी प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी को देशद्रोही गतिविधियों का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा. वहीं दिल्ली सरकार ने जेएनयू में देश विरोधी नारे लगाने वाली घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए है.
नारे लगाने के मामले में एबीवीपी को भी लपेटा है. इस मामले की नई दिल्ली के डीएम जांच करेंगे जिन्हें अगले 15 दिन के अंदर रिपोर्ट सौंपनी है. गौरतलब है कि शनिवार को लेफ्ट नेताओं ने केजरीवाल से मुलाकात की थी.

मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी से जुड़े ये 7 विवाद



नई दिल्ली: मई 2014 में पीएम नरेंद्र मोदी सरकार में स्मृति ईरानी को मानव संसाधन मंत्री का पद मिला था. तब से लेकर अब तक उनके साथ कई विवाद जुड़ चुके हैं.
शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि किसी भी प्रकार से भारत माता के अपमान को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. इनका ये बयान दिल्ली की जेएनयू यूनिवर्सिटी में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों की शिकायत पर आया था.
स्मृति के कार्यकाल में यूनिवर्सटी से जुड़े विवादों का ये पहला मौका नहीं है.
1. डीयू ग्रेजुएट कोर्स विवाद 
स्मृति ईरानी के शिक्षा मंत्री बनने के बाद यूजीसी के निर्देश पर दिल्ली यूनिवर्सिटी को चार साल का डिग्री कोस वापस लेना पड़ा था.

2. आईआईटी कैंटीन विवाद
IIT में शाकाहारी छात्रों के लिए अलग कैंटीन की सिफारिश पर भी शिक्षा मंत्रालय की किरकिरी हो चुकी है.
3. अंबेडकर पेरियार ग्रुप विवाद
मोदी सरकार की आलोचना को लेकर IIT मद्रास में दलित छात्रों के ग्रुप आंबेडकर पेरियार पर बैन लगा था. स्मृति ईरानी के मंत्रालय की चिट्ठी के बाद ये कार्रवाई हुई थी.

4. डिग्री फर्जीवाड़ा विवाद
शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी पर दो अलग चुनावी शपथपत्र में अपनी शिक्षा के बारे में अलग-अलग जानकारी देने का आरोप है.

5. पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी विवाद
पॉन्डीचेरी यूनिवर्सिटी में इस्लामीकरण के आरोप की जांच के आदेश शिक्षा मंत्रालय ने दिए थे. जांच में आरोप बेबुनियाद निकले थे.

6. हैदराबाद यूनिवर्सिटी विवाद
हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमुला की खुदकुशी पर भी स्मृति के मंत्रालय की किरकिरी हो चुकी है. यूनिवर्सिटी के कुछ दलित छात्रों के खिलाफ बीजेपी के छात्र संगठन एबीवीपी के एक छात्र नेता की पिटाई का आरोप लगा था. जो

7. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी विवाद
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे को लेकर विरोध जताकर मंत्रालय विवादों में आ चुका है.

थम नहीं रहा जेएनयू विवाद सेना के नाराज अफसरों ने अपनी डिग्री लौटाने को कहा


नई दिल्ली: जेएनयू में देशद्रोह विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. देशद्रोह के नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार छात्रसंघ के अध्यक्ष कन्हैया की रिहाई की मांग हो रही है. लेफ्ट नेता गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मिले. राजनाथ सिंह ने कहा है कि दोषियों को नहीं बख्शेंगे और निर्दोष नहीं फंसेंगे. इन सबके बीच सवाल बना हुआ है कि क्या जेएऩयू देशद्रोहियों का अड्डा बन गया है.
इस विवाद में अब सेना के वे पूर्व अफसर भी कूद पड़े हैं जिन्हें नेशनल डिफेंस अकेडमी यानी एनडीए में रहते हुए जेएनयू से ग्रेजुएशन की डिग्री मिली थी. अब 1978 में पास हुए एनडीए के 54वें बैच के अफसरों ने चिट्ठी लिखकर कहा है कि हाल ही में जेएनयू में छात्र अफजल गुरु दिवस मनाने जैसी देशविरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. ऐसी घटनाएं हमारे जैसे डिग्रीधारक के बलिदान को कम आंकना है. अभी जेएनयू देशविरोधी गतिविधियों का अड्डा बन गया है. अगर आगे भी ऐसा होता रहा तो हम अपनी डिग्री लौटा देंगे.
9 फरवरी के देश के प्रतिष्ठित संस्थान जेएनयू में लगे इन देश विरोधी नारों पर अब सियासत गरमा गई है. देशविरोधी नारों पर जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष को गिरफ्तार कर लिया गया है जिसकी रिहाई की मांग के लिए गृह मंत्री से लेफ्ट के नेता जाकर मिले. लेफ्ट से जुड़े सीपीआई के छात्रसंगठन aisf से कन्हैया जेएनयू छात्रसंघ का अध्यक्ष चुना गया है.
राजनाथ सिंह ने भी दो टूक कहा है कि जो निर्दोष हैं उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए लेकिन जो लोग पाकिस्तान जिंदाबाद और भारत की बर्बादी के नारे लगा रहे हैं उनके खिलाफ तो कार्रवाई होगी.
जेएनयू विवाद में आज वाम नेता डी राजा की बेटी का नाम भी उछला. बीजेपी के सांसद महेश गिरि ने वीडियो जारी करके दावा किया है कि देशविरोधी नारे जिस कार्यक्रम में लगे उसमें सीपीआई नेता डी राजा की बेटी अपराजिता भी मौजूद थी.
इस बीच दिल्ली पुलिस ने फुटेज देखकर जिन छात्रों की पहचान हुई है उसके बारे में जेएनयू वीसी से चिट्ठी लिखकर जानकारी मांगी है. इन छह छात्रों में छात्र संघ का अध्यक्ष कन्हैया गिरफ्तार हो चुका है जबकि उमर खालिद, आशुतोष कुमार, अनिर्बान भट्टाचार्य, रामा नागा और अनंत प्रकाश को जांच में शामिल होने के लिए कहा गया है.

'मेक इन इंडिया' के पहले वीक का मुंबई में पीएम मोदी ने किया का आगाज


मुंबई: ‘मेक इन इंडिया वीक’ की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मुंबई के एमएमआरडीए मैदान में ‘मेक इन इंडिया’ केंद्र का उद्घाटन किया. इस मौके पर मोदी के साथ स्वीडन के प्रधानमंत्री जेल स्टीफन लॉफेन और फिनलैंड के प्रधानमंत्री जूहा पेट्री सिपिला भी मौजूद थे.
एक सप्ताह तक होने वाले इस औद्योगिक आयोजन में 2,500 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय और 8,000 घरेलू कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. इसमें 68 देशों से विदेशी सरकारी प्रतिनिधिमंडल और 72 देशों के कारोबारी प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं.
सितंबर 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ पहल की वैश्विक शुरुआत के बाद नवाचार, रचना और स्थिरता के विषय पर आधारित मेक इन इंडिया क्रेंद्र देश के सबसे नवीन और उत्कृष्ट उत्पादों का प्रदर्शन और निर्माण करेगा. मेक इन इंडिया पहल की वैश्विक शुरुआत सितम्बर 2014 में हुई थी.
उद्घाटन के तुरंत बाद मोदी ने अलग-अलग पवेलियनों में जाकर लॉफेन और सिपिला के साथ मिलकर भारत के कौशल और विभिन्न क्षेत्रों ऑटोमोबाइल, रक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विशिष्ट नवाचार, रचनाओं के उत्कृष्ट नमूने देखे.
‘मेक इन इंडिया’ केंद्र के उद्घाटन के बाद मोदी एनएससीआई मैदान में मेक इन इंडिया वीक की औपचारिक शुरुआत करेंगे. ‘मेक इन इंडिया’ के माध्यम से भारत को ‘प्रिफर्ड मैन्यूफैक्चिरिंग डेस्टिेनेशन’ के रूप में पेश किया जाएगा.
यह सप्ताह (13-18 फरवरी) भारतीय और वैश्विक उद्योग के लोगों को आपस में जुड़ने का अवसर देगा. जिसमें उन्हें व्यापार और अपार अवसरों को भुनाने का मौका मिलेगा.
इस मेक इन इंडिया वीक में विभिन्न संघ और राज्य के मंत्री, मुख्यमंत्री, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, भारत और विदेशों के शीर्ष उद्योगपति और कई सरकारी तथा व्यापार प्रतिनिधिमंडल के लोग हिस्सा लेंगे.
80 करोड़ का बजट, 4 लाख करोड़ लक्ष्य
आयोजन में कई देशों की सरकार और राज्यों के प्रमुख भी हिस्सा ले रहे हैं. इनमें स्वीडन, फिनलैंड के प्रधानमंत्री और पोलैंड के उप प्रधानमंत्री शामिल हैं. उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक आयोजन से 4 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. डीआईपीपी सचिव अमिताभ कांत के मुताबिक सरकार ने 13 से 18 फरवरी तक चलने वाले इस कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है. इसके लिए 80 करोड़ रपये का बजट रखा गया है.

होगी दिग्गज कारोबारियों से बातचीत
मध्य मुंबई में वर्ली स्थित एनएससीआई ऑडिटोरियम में मेक इन इंडिया सप्ताह का उद्घाटन हुआ. यहां रतन टाटा, साइरस मिस्त्री, मुकेश अंबानी, अजय पीरामल, कुमार मंगलम बिड़ला, आनन्द महिंद्रा और गौतम अडाणी जैसे दिग्गज उद्योगपतियों के साथ उनकी बातचीत होने की संभावना है. इस कार्यक्रम में 17 राज्य शामिल हो रहे हैं. इनमें ज्यादातर भाजपा शासित राज्य हैं. समारोह में 52 संगोष्ठियों का आयोजन होगा जिसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के शीर्ष अधिकारी शामिल होंगे. गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, ओड़िशा और पंजाब को लेकर राज्य केंद्रित सत्रों का आयोजन तय किया गया है.

दायरे में नहीं बांधा जा सकता है आर्ट
इससे पहले पीम मोदी ने बॉम्बे आर्ट सोसायटी की नई इमारत का उट्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने कहा कि हमने तीन सदियों से दुनियाभर को आर्ट के जरिए साकारात्मक संदेश दिए हैं. हमारे समाज की यह ताकत है. पीएम मोदी ने कहा कि आर्ट को दायरे में नहीं बांधा जा सकता और न ही इसपर कोई पाबंदी लगाई जा सकती है. उम्र, जाति, मजहब, क्षेत्र और नस्ल वगैरह से आर्ट मुक्त होता है. उन्होंने कहा कि कागज या कैनवास से पहले आर्टिस्ट के दिलों में आर्ट उतरता है. पीएम मोदी ने कहा कि भारतीय कला और संस्कृति पर हम सबको गर्व करना चाहिए.

आईबी के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र कुमार का बयान,मोदी पर हमला करने के लिए अहमद पटेल ने छिपाया सच


नई दिल्ली: दो दिन पहले मुंबई हमले के गुनहगार हेडली ने गवाही में बताया था कि गुजरात में एनकाउंटर में मारी गई इशरत जहां आतंकी थी. इसके बाद आईबी के पूर्व डायरेक्टर राजेंद्र कुमार का बयान आया है जो कांग्रेस की अगुवाई वाले यूपीए की सरकार पर सवाल खड़े कर रहा है.
राजेंद्र कुमार ने कहा है कि मोदी पर हमला करने के लिए यूपीए सरकार ने जान बूझकर इशरत का सच छिपाया. बड़ी बात ये है कि राजेंद्र कुमार का कहना है कि यूपीए सरकार में ये सच कांग्रेस के उस बड़े नेता के कहने पर छिपाया गया जो गुजरात से आते हैं लेकिन राजेंद्र उस नेता का नाम नहीं बता रहे.
राजेंद्र कुमार ने अपने बयान में कहा, “सबको पता था कि ये एक काउंटर टेररिज़्म ऑपरेशन था. ये अंडर कवर काउंटर टेररिज़्म ऑपरेशन था. लेकिन उस देश के अंदर जो सबसे ताकतवर आदमी था.”
राजेंद्र कुमार ने आगे कहा, ”इस देश को मनमोहन सिंह नहीं चला रहे थे इस देश को गुजरात से आने वाले एक बड़े कांग्रेसी नेता चला रहे थे. वही नेता उस वक्त प्रोजेक्ट न्यूट्रलाइज़ मोदी को चला रहे थे.”
राजेंद्र कुमार ने किसी की नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा कांग्रेस के दिग्गज नेता अहमद पटेल की तरफ था. आपको बता दें अमित शाह ने भी जब इस मामले को लेकर आरोप लगाए थे तो उन्होंने भी अहमद पटेल का नाम लिया था. कांग्रेस अब राजेंद्र कुमार के आरोपों को सिरे खारिज कर रही है तो वहीं बीजेपी अहमद पटेल के जरिए सीधे 10 जनपथ पर निशाना साधने की कोशिश कर रही है.
इशरत जहां आतंकवादी थी या नहीं, इसका पूरा सच शायद ही कभी सामने आए. लेकिन बीते 12 सालों में इस नाम को लेकर देश की दो बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने जमकर एक दूसरे पर हमले किए. कांग्रेस इशरत जहां के एनकाउंटर को लेकर उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेंद्र मोदी को हमेशा निशाना बनाती रही.

बीजेपी के नेता महेश गिरी का दावा JNU देशविरोधी नारों में डी राजा की बेटी अपराजिता भी शामिल



नई दिल्ली: जेएनयू में देशविरोधी नारों में सीपीआई महासचिव डी राजा की बेटी अपराजिता भी शामिल थीं ये दावा किया है महेश गिरी ने जो भारतीय जनता पार्टी के पूर्वी दिल्ली से सांसद हैं , उन्होंने सबूतों सहित ये आरोप लगाये हैं साथ ही उन्होंने जवाहरलाल नेहरु यूनिवर्सिटी में देश विरोधी कार्य्रकम का एक वीडियो भी ट्विटर पर  जारी किया है जिसमें अपराजिता देश विरोधी नारे लगाने वाले उमर खालिद का हाथ पकडे दिख रही हैं।.

जेएनयू देशद्रोह : लेफ्ट नेताओं ने की गृहमंत्री से मुलाकात



नई दिल्ली: जेएनयू में देशविरोधी नारे को लेकर हुए विवाद पर लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी और डी राजा ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की. मुलाकात के बाद लेफ्ट नेता सीताराम येचुरी ने कहा, ”हमने गृहमंत्री को अपनी बात बताई है. गृहमंत्री ने आश्वासन दिया है कि किसी निर्दोष पर कार्रवाई नहीं की जाएगी. इस मुलाकात में लेफ्ट नेताओं के साथ जेडीयू सांसद केसी त्यागी भी मौजूद थे.
सीताराम ने आगे कहा कि हमने जेएनयू के मौजूदा हालातों से गृहमंत्री को अवगत कराया है. इसके साथ ही उन्हें ये भी बताया कि ये बहुत गंभीर मामला है.
जिस तरह से पूरे विश्वविद्यालय को देशद्रोह की छाप लगाकर जो कार्रवाई की जा रही है वो आपातकाल के दौर से भी बद्तर है. आज कोई भी इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं है कि जेएनयू के छात्र देशद्रोही हैं.
सीताराम ने आगे कहा कि नए वीसी के जरिए जो पुलिस को कैंपस में कार्रवाई की इजाजत दी गई. इस तरह की घटना पहले हैदराबाद सेंट्रल विश्वविद्यालय में हुई थी.
येचुरी ने आरोप लगाया कि इस तरह से सरकार देश के उच्चतम संस्थानों पर आरएसएस की विचारधारा लागू करना चाहती है. हम इसका विरोध करते हैं.
सीताराम ने कहा, ”हमने गृहमंत्री को बताया है कि जिस बीस छात्रों के नाम उस लिस्ट में और जो नारे लगा रहे हैं ये लोग एक नहीं हैं.
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा, ”कन्हैया जिस पार्टी का नेता है उसका मानना है कि कश्मीर भारत का हिस्सा है तो फिर उस पर देशद्रोह का आरोप कैसे लगा सकते हैं?”
क्या है जेएनयू विवाद?
9 फऱवरी को जेएनयू में वामपंथी और दलित संगठनों से जुड़े छात्रों ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी मनाई. इसमें कश्मीर के छात्र भी शामिल थे. इसके लिए कैंपस में एक सांस्कृतिक संध्या का आय़ोजन भी किया गया था. इस दौरान देश विरोधी नारे भी लगाए गए. आरोप है कि विरोध करने पर इन लोगों ने ABVP के कार्यकर्ताओं की पिटाई भी की.
जेएनयू प्रशासन इस बात की जांच शुरू कर चुका है कि आखिर इजाजत नहीं मिलने के बाद भी कैंपस में अफजल गुरु की बरसी का कार्यक्रम कैसे आयोजित हुआ.
वैसे ये पहला मौका नहीं है जब देश की इस नामी यूनिवर्सिटी में इस तरह की देश विरोधी हरकत हुई है. अफजल गुरु की फांसी के वक्त भी यहां विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे.

भारत में फेसबुक की पहली कर्मचारी फेसबुक इंडिया की हेड कीर्तिगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा


नई दिल्ली: भारत में फेसबुक की पहली कर्मचारी रहीं कीर्तिगा रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया है। कीर्तिगा महाराष्ट्र के नांदेड की रहने वाली है। उन्होंने इंजीनियरिंग के बाद स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया। 2011 में वे फार्च्यून की 50 ताकतवर महिलाओं की लिस्ट में शामिल थीं। कीर्तिगा ने इस्तीफे के एलान के साथ अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मुझे मालूम था कि एक दिन वापस यूएस जाना पडेगा। अगले 6 से 12 महीने कुछ नहीं बदलेगा। मैं अपनी बेटियों के साथ रहूंगी। मैंने मेनलो पार्क में फेसबुक में ही नए मौके तलाशने शुरू कर दिए हैं। 
कंपनी के सूत्रों के मुताबिक कीर्तिगा से इस्तीफे की उम्मीद नहीं थी। इसी वजह से कंपनी ने उनके बाद नए नाम का पहले से एलान नहीं किया है। फेसबुक से पहले वे मोटोरोला में प्रोडेक्ट मैनेजमेंट डिपाटर्मेट में डायरेक्टर थीं।
इससे पहले सिलिकॉन ग्राफिक्स और फीनिक्स टेक्नोलॉजीज में काम कर चुकी हैं। आपको बता दें कि नेट न्यूट्रैलिटी के फेवर में आए ट्राई के हालिया फैसले से फेसबुक को झटका लगा है। कंपनी ने हाल ही में फ्री बेसिक्स को भारत में बंद करने का एलान किया था। इसी के बाद कीर्तिगा ने कंपनी छोडी है। लेकिन वे फेसबुक के ही मेनलो पार्क हेडक्वार्टर्स में नए मौके चाहती हैं। 

सेना के पूर्व अफसरों ने की डिग्री वापसी की पेशकश


नई दिल्ली: देश विरोधी नारों से नाराज एनडीए यानी नेशनल डिफेंस एकेडमी के 54वें बैच के सेना के अफसरों ने डिग्री वापसी की पेशकश की है. अफसरों ने जेएनयू के वीसी को चिट्ठी लिखी लिखी है.
इस चिट्ठी में कहा गया है कि अगर कैंपस में इसी तरह से देश विरोधी गतिविधियां चलतीं रहीं तो वे अपनी डिग्री लौटा देंगे. पूरे मामले की शुरुआत 9 फरवरी को हुई जब अफजल गुरु की फांसी के विरोध में कार्यक्रम आयोजित किया गया और इसी कार्यक्रम में देश विरोधी नारे लगे .
इसी मामले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया को कल गिरफ्तार किया गया था.
पूर्व सैनिकों ने जेएनयू वीसी को लिखी में लिखा,
”हम 1978 बैच के एनडीए के सैनिक हैं, जेएनयू से हमें बीए की़ डिग्री मिली है जिसकी हमें गर्व है. लेकिन हाल ही में छात्र अफजल गुरू दिवस मनाने जैसी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. ऐसी घटना हमारे जैसे डिग्री होल्डर के बलिदान को कम आंकना है. अभी जेएनयू देशविरोदी गतिविधियों का अड्डा बन गया है. अगर आगे भी ऐसा होता रहा तो हम अपनी डिग्री लौटा देंगे. ”
आपको बता दें एनडीए के पासआउट अधिकारियों को ऑनरेरी स्नातक की जो डिग्री मिलती है वो जेएनयू से ही मिलती है, क्योंकि एनडीए की अपनी कोई यूनिवर्सिटी नहीं है. इसलिए भरतीय सेना ने जेएनयू के साथ समझौता किया है. सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है.

कैलाश विजयवर्गीय के बिगड़े बोल - काट देनी चाहिये पाकिस्तान जिंदाबाद करने वाले लोगों की जुबान


नई दिल्ली: बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने एक पूर्व सैनिक का जिक्र करते हुए  पूछा कि क्या भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद करने वाले लोगों की जुबान नहीं काट देनी चाहिये?
बीजेपी महासचिव और मध्य प्रदेश के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय ने एक बार फिर एक विवादास्पद बयान दिया है. उन्होंने ट्वीट किया कि क्या भारत में रहकर पाकिस्तान जिंदाबाद करने वालों की जुबान नहीं काट देनी चाहिये? आज इलाहबाद में एक पूर्व सैनिक ने मुझसे एक ऐसा सवाल किया, जो आज हर राष्ट्रभक्त को सता रहा है. प्रश्न था- हम सैनिक सीमा पर प्राणों की बाजी क्या इसलिये लगाते हैं कि देश के अंदर लोग पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाएं और कोई कुछ न कहे?” मुझे लगा कि उन पूर्व सैनिक के मुंह से आज भारत का हर राष्ट्रभक्त बोल रहा है. लेकिन सवाल यह उठता है, कि भारत जैसे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मर्यादाओं का पालन करने वाले देश में क्या यह संभव है?

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला ,अब रात 11 बजे के बाद ही दिल्ली में घुसेंगे ट्रक



नई दिल्ली: दिल्ली में अब बाहर से आने वाले ट्रकों को रात 11 बजे के बाद ही एंट्री की इजाजत मिलेगी। दिल्ली सरकार ने उनकी एंट्री को रात साढे नौ बजे से आगे बढाने का फैसला किया है। दिल्ली में बढते प्रदूषण को कम करने की कवायद के तहत यह फैसला लिया गया है। 
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी के मुताबिक राजधानी में प्रवेश करने वाले ट्रकों को अब सिर्फ रात 11 बजे से प्रवेश की इजाजत दी जाएगी और इसका उल्लंघन करने वालों पर 2,000 रूपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अधिकारी ने कहा कि इस सिलसिले में एक अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है। 

उच्चतम न्यायालय का ऑड-ईवन फार्मूले पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस



नई दिल्ली: दिल्ली उच्चतम न्यायालय ने ऑड-इवन को लेकर दायर एक याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिका में कहा गया कि सरकारें मोटर व्हीकल्स एक्ट का पालन नहीं कर रही हैं और प्रदूषण कम करने की बजाय गाडियों की संख्या कम करने पर जोर है। मामले में 30 मार्च को अगली सुनवाई होगी। 

जानकारी के मुताबिक याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण कम करने को लेकर ठोस कदम नहीं उठा रही है। याचिका में कहा गया है कि ऑड इवन की व्यवस्था सडकों पर वाहनों की संख्या कम करने के लिए लागू की जा रही है, जबकि प्रदूषण को कम करने के उन गाडियों पर रोक लगाने की जरूरत है जो प्रदूषण फैला रही हैं। सरकार को चाहिए कि वह उनके खिलाफ एक्शन ले। शुक्रवार को इस पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 मार्च की तारीख तय की है। 

जेएनयू देशद्रोह - देश के गद्दार किसी भी कीमत पर बख्शे नहीं जायेंगे : राजनाथ सिंह


नई दिल्ली: गृह मंत्री ने कहा है कि JNU में देश विरोधी नारे लगाने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी . उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को किसी भी कीमत पर माफ नहीं किया जाएगा. 9 फरवरी की रात JNU में भारत विरोधी नारे लगाये गये थे. इतना ही नहीं गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में भी पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गये थे.
”भारत मां का अपमान ये राष्ट्र कभी सहन नहीं करेगा”
जेएनयू विवाद पर शिक्षा मंत्री स्मृति ने प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा, “आज सरसस्वती की वंदना का दिन है, माँ सरस्वती हर परिवार को ये वरदान देती है की उनके कंठ से जो स्वर निकले वह राष्ट्र को और उन्नत करने के लिए निकले, और सशक्त करने के लिए निकले. भारत मां का जयगान हो, भारत मां का अपमान ये राष्ट्र कभी सहन नहीं करेगा.”
देश विरोध पर देशद्रोह का केस
दोनों मामलों में पुलिस ने कल बीजेपी सांसद महेश गिरी और ABVP छात्र नेताओं की शिकायत पर देशद्रोह का केस दर्ज कर रखा है. दिल्ली की वसंत कुंज नॉर्थ पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ देशद्रोह से जुड़ी धारा 124A के तहत केस दर्ज किया है. पुलिस ने कार्यक्रम के वीडियो फुटेज की जांच भी शुरू कर दी है.
आतंकी अफजल गुरु के नाम पर कार्यक्रम आयोजित करने के तीन दिन बीतने के बाद भी अभी तक किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया है. इस पूरे मामले पर ABVP ने आज दोपहर इंडिया गेट पर बड़े विरोध प्रदर्शन का एलान किया है.
देशद्रोह पर देश भर में गुस्सा
जेएनयू में देशद्रोहिय़ों के खिलाफ लोगों का गुस्सा भी भड़क गया है. मुनिरका इलाके में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया है. यूनिवर्सिटी से देशद्रोहियों को निकालने की मांग को लेकर लोग सड़क पर उतर आये हैं.
क्या है JNU का ये पूरा विवाद?
9 फऱवरी को जेएनयू में वामपंथी और दलित संगठनों से जुड़े छात्रों ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी मनाई. इसमें कश्मीर के छात्र भी शामिल थे. इसके लिए कैंपस में एक सांस्कृतिक संध्या का आय़ोजन भी किया गया था. इस दौरान देश विरोधी नारे भी लगाए गए. आरोप है कि विरोध करने पर इन लोगों ने ABVP के कार्यकर्ताओं की पिटाई भी की.
जेएनयू प्रशासन इस बात की जांच शुरू कर चुका है कि आखिर इजाजत नहीं मिलने के बाद भी कैंपस में अफजल गुरु की बरसी का कार्यक्रम कैसे आयोजित हुआ.
वैसे ये पहला मौका नहीं है जब देश की इस नामी यूनिवर्सिटी में इस तरह की देश विरोधी हरकत हुई है. अफजल गुरु की फांसी के वक्त भी यहां विरोध प्रदर्शन देखने को मिले थे.